Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1046

गुरु · Guru

जीवत मिरतक होय रहै, तजै खलक की आस। रच्‍छक समरथ सद्गुरु, मति दुख पावै दास।।