Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1047

आत्मचिंतन · Self-reflection

पांचों इन्द्रिय छठा मन, सम संगत सूचंत। कहैं कबीर जग क्‍या करे, सातों गांठ निश्चिन्‍त।।