Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #11

प्रेम · Love

प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय। राजा परजा जेहि रुचै, सीस देइ ले जाय॥