Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #110

सत्य · Truth

कबीरा जपना काठ की, क्या दिख्लावे मोय। ह्रदय नाम न जपेगा, यह जपनी क्या होय।।