Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1109

वैराग्य · Detachment

परमारथ पाको रतन, कबहुं न दीजै पीठ। स्‍वारथ सेमन फूल है, कली अपूठी पीठ।।