Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1114

मृत्यु · Mortality

धन रहै न जोबन रहै, रहै न गांव न ठांव। कबीर जग में जस रहै, करिदे किसी का काम।।