Kabir Amritwani
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #1116
आत्मचिंतन · Self-reflection
कुंभै बांधा जल रहै, जल बिन कुंभ न होय। ज्ञानै बांध बन रहै, मन बिनु ज्ञान न होय।।
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