Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1158

गुरु · Guru

मन दाता मन लालची, मन राजा मन रंक। जो यह मन गुरु सो मिलै, तो गुरु मिले निसंक।।