Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1160

आत्मचिंतन · Self-reflection

मन पांचौं के बस पड़ा, मन के बस नहिं पांच। जित देखूं तित दौं लगी, जित भाग् तित आंच।।