Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #118

वैराग्य · Detachment

जाके जिव्या बन्धन नहीं, ह्र्दय में नहीं साँच। वाके संग न लागिये, खाले वटिया काँच।।