Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1180

भक्ति · Devotion

छाडै बिन छूटै नहीं, छोड़न हारा राम। जीव जतन बहुतरि करै, सरे न एकौ काम।।