Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1306

ज्ञान · Wisdom

निन्‍दक एकहु मति मिलै, पापी मिलै हजार। इस निन्‍दक के शीश पर, लाख पाप का भार।।