Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1337

गुरु · Guru

कबीर करनी क्‍या करै, जो गुरु नहीं सहाय। जिहि जिहि डारी पगु धरै, सों सों निंवनिंव जाय।।