Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1354

करुणा · Compassion

कबीर चंदन पर जला, तीतर बैठा मांहि। हम तो दाझत पंख बिन, तुम दाजत हो काहि।।