Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1385

अहंकार · Ego

मनही में फूला फिरै, करता हूं मैं धर्म। कोटि कर्म सिर पर चढ़े, चेति न देखे मर्म।।