Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1402

प्रेम · Love

जहां दया वहां धर्म है, जहां लोभ तहं पाप। जहां क्रोध वहां काल है, जहां क्षमा वहां आप।।