Kabir Amritwani
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #1441
समय · Time
कबीर सुपिनैं हरि मिल्या, सूतां लिया जगाई। आंखि न मीचौ डरपता, मति सुपिनां ह्वै जाइ।।
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