Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
आज का दोहा
प्रीमियम
लॉग इन / रजिस्टर
आज का दोहा
प्रीमियम
लॉग इन / रजिस्टर
Kabir Amritwani
कबीर दोहा #1464
वैराग्य · Detachment
आपा तजे हरि भजे, नखसिख तजे विकार। सब जीवन से निबरहे, साधुमता है सार।।
कॉपी
शेयर
WhatsApp