Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1471

आत्मचिंतन · Self-reflection

ऊपरि की दोऊ गई, हियहु कि फूटी आंखि। कबीर बिचारा क्‍या करे, जो जिवहिं नाही झांंकि‍।।