Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #1496
माया · Illusion
काहे हरिणी दुर्बली, चरे हरियरे ताल। लक्ष्य अहेरी एक मृग, केतिक टारे भाल।।
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