Kabir Amritwani
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #1507
गुरु · Guru
गुरु सिकलीगर कीजिए, मनहि मसकला देइ। शब्द छोलना छोलिके, चित्त दर्पण करि लेइ।।
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