Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #153

गुरु · Guru

हरि संगत शीतल भया, मिटी मोह की ताप। निशिवासर सुख निधि, लहा अन्न प्रगटा आप।।