Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #155

भक्ति · Devotion

अटकी भाल शरीर में, तीर रहा है टूट। चुम्बक बिना निकले नहीं, कोटि पठन को फूट।।