Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1564

भक्ति · Devotion

ढाढस देखह मरजीवा को, धर जोरि पैढा पाताल। जीव के अटक माने नहीं, ले गहि निकसा लाल।।