Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1587

माया · Illusion

नव मन दुग्‍ध बटोरिके, टिपके भया विनास। दूध फाटि कांजी भया, हुआ घृतहु को नास।।