Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1600

अहंकार · Ego

पांवहिं पहुमी नापते, दरिया करते फाल। हाथन्हि पर्वत तोलते, तेहि धरि खायो काल।।