Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1642

मृत्यु · Mortality

तन बोहित मन काग है, लक्ष जोजन उड़‍ि जाय। कबहुंक भरमे आगम दरिया, कबहूं गगन समाय।।