Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #165

गुरु · Guru

कबीरा संगति साधु की, जित प्रीत कीजै जाय। दुर्गति दूर वहावति, देवी सुमति बनाय।।