Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
आज का दोहा
प्रीमियम
लॉग इन / रजिस्टर
आज का दोहा
प्रीमियम
लॉग इन / रजिस्टर
Kabir Amritwani
कबीर दोहा #1684
भक्ति · Devotion
विरह की ओदी लाकरी, सपचे औ धुंधवाय। दुख ते तब ही बांचिहो, जब सकलो जरि जाय।।
कॉपी
शेयर
WhatsApp