Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1688

भक्ति · Devotion

शब्‍द बिना सुरति आंधरी, कहो कहां को जाय। द्वार न पावै शब्‍द का, फिर‍ि फिर‍ि भटका खाय।।