Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1734

भक्ति · Devotion

कबीर हरि रस बरषिया, गिर डूंगर सिषरांह। नीर मिबाणां ठाहरै, नाऊं छापरड़ाह।।