Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1775

भक्ति · Devotion

हंसि हंसि कंत न पाइए, जिनि पाया तिनि रोइ। जो हांसें ही हरि मिलै, तौ नहीं दुहागनि कोइ।।