Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1786

वैराग्य · Detachment

परबति परबति मैं फिरया, नैंन गंवाये रोइ। सो बूटी पाऊं नहीं, जातैं जीवनि होइ।।