Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1793

भक्ति · Devotion

कौतिग दीठा देह बिन, रवि ससि बिना उजास। साहिब सेवा मांहि है, बेपरवाही दास।।