Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1797

भक्ति · Devotion

अंतर कवल प्रकासिया, ब्रह्म वास तहां होइ। मन भवरा तहां लुबधिया, जांणैगा जन कोइ।।