Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1809

भक्ति · Devotion

चौहटे चिंतामंणि चढ़ी, हाडी मारत हाथि। मीरां मुझसूं मिहर करि, इब मिलौं न काहू साथि।।