Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #1813
भक्ति · Devotion
सुरति समांणी निरति मैं, अपजा माहै जाप। लेख समांणं अलेख मैं, यूं आपा मांहे आप।।
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