Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1853

भक्ति · Devotion

मन प्रतीति न प्रेम रस, नां इस तन मैं ढंग। क्‍या जाणौं उस पीव सूं, कैसे रहसी रंग।।