Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1858

भक्ति · Devotion

बासुरि गमि न रैंणि गमि, नां सुपनैं तरगंम। कबीर तहां बिलंबिया, जाहं छाहड़ो न घंम।।