Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1874

भक्ति · Devotion

कबीर सोचि विचरिया, दूजा कोई नांहि। आपा पर जब चीन्हिया, तब उलटि समाना मांहि।।