Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1878

ध्यान · Meditation

सोई आशिष सोई बैयन, जन जू जू बांचवंत। कोई एक मेलै लवणि, अमी रसाइण हुंत।।