Kabir Amritwani
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #1917
आत्मचिंतन · Self-reflection
सूरा झूझै गिरद सूं, इक दिसि सूर न होइ। कबीर यौं बिन सूरिवां, भला न कहिसी कोइ।।
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