Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1918

भक्ति · Devotion

कबीर आरणि पैसि करि, पीछैं रहै सु सूर। सांई सूं साचा भया, रहसी सदा हजूर।।