Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #1933
भक्ति · Devotion
सूर सीस उतारिया, छाड़ा तन की आस। आगैं थैं हरि मुलकिया, आवत देख्या दास।।
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