Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1940

कर्म · Action

कोइ एक देखै संत जन, जांकै पांचूं हाथि। जाके पांचूं बस नहीं, ता हरि संग न साधि।।