Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #1960
आत्मचिंतन · Self-reflection
जिहि सर घड़ा न डूबता, अब मैंगल मलि मलि न्हाइ। देवल बूड़ा कलम सूं, पंषि तिसाई जाइ।।
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