Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #1992
सत्य · Truth
राम जपत दालिद भला, टूटि घर की छांनि। ऊचे मंदिर जालि दे, जहां भगति न सारंगपांनि।।
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