Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1995

भक्ति · Devotion

कबीर हरि का भावता, झीणां पंजर तास। रैणि न आवै नींदड़ी, अंगि न चढ़ई मास।।