Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #1999

आत्मचिंतन · Self-reflection

जिहि घटि जांण बिनांण है, तिहि घटि आबटणां घणां। बिन षडै संग्राम है, नित उठि मन सौं झूझुणां।।