Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #2003

ध्यान · Meditation

कांमणि अंग बिरकत भया, रत भया हरि नांहि। साषी गोरखनाथ ज्‍यूं, अमर भए कलि मांहि।।